मधुमक्खियाँ: कैंसर स्क्रीनिंग की नई उम्मीद
क्या मधुमक्खियों को कैंसर सूँघना सिखाया जा सकता है?
हाँ, मधुमक्खियों को कैंसर पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि मधुमक्खियों की सूँघने की क्षमता असाधारण रूप से तीव्र होती है—ये सबसे हल्के गंधों को भी पकड़ सकती हैं, जिनमें बीमारियों से जुड़े रासायनिक संकेत शामिल हैं। इसी खूबी की बदौलत आज मधुमक्खियों की सूँघने की ताकत को कैंसर स्क्रीनिंग के लिए जुटाया जा रहा है।
कैंसर स्क्रीनिंग में मधुमक्खी का इस्तेमाल कैसे होता है
‘बीज़’ (Bee’s) नाम का एक काँच का उपकरण ब्रिटेन की डिज़ाइनर सुसाना सोअरेस ने बनाया है। इसमें दो हिस्से हैं—एक बड़ा कक्ष और एक छोटा जुड़ा हुआ कक्ष। मरीज़ छोटे कक्ष में साँस छोड़ता है और मधुमक्खियों को बड़े कक्ष में छोड़ा जाता है। यदि मधुमक्खियों ने कैंसर से जुड़ी कोई विशेष गंध पाई, तो वे उस ओर झुंड बनाकर उड़ेंगी।
मधुमक्खी आधारित जाँच के फ़ायदे
दूसरी स्क्रीनिंग विधियों की तुलना में मधुमक्खियाँ कई मोर्चे पर आगे हैं:
- उच्च सटीकता: मधुमक्खियाँ 98% तक सटीकता से कैंसर का पता लगा सकती हैं।
- तेज़ प्रशिक्षण: स्निफ़र कुत्तों की तुलना में मधुमक्खियों को मात्र 10 मिनट में प्रशिक्षित किया जा सकता है।
- कम लागत: पालना और प्रशिक्षित करना सस्ता है।
- गैर-आक्रामक: यह विधि शरीर में किसी सुई या कट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
चुनौतियाँ
फ़ायदों के बावजूद कुछ अड़चनें भी हैं:
- सीमित उपलब्धता: हर इलाक़े में मधुमक्खियाँ आसानी से नहीं मिलतीं।
- विशेष देखभाल: इन्हें विशेषज्ञ प्रशिक्षण और देखभाल चाहिए।
- ग़लत-सकारात्मक परिणाम: पर्यावरण के दूसरे गंधों से मधुमक्खियाँ भ्रमित हो सकती हैं।
मधुमक्खी स्क्रीनिंग का भविष्य
यह तकनीक अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन कैंसर पकड़ने के तरीक़ों में क्रांति ला सकती है। शोधकर्ता चुनौतियों को दूर करने और अधिक भरोसेमंद उपकरण विकसित करने में जुटे हैं।
चिकित्सा में कीटों की भूमिका
मधुमक्खी अकेली नहीं; सदियों से मैगट (कृमि) और जोंक घाव साफ़ करने के काम आते रहे हैं। आज वैज्ञानिक संक्रामक रोगों की पहचान या ब्लड-शुगर निगरानी जैसे अन्य चिकित्सा उपयोगों में भी कीटों की संभावना तलाश रहे हैं।
निष्कर्ष
मधुमक्खी आधारित कैंसर स्क्रीनिंग एक आशाजनक नया रास्ता है जो जाँच की दर बढ़ाकर जीवन बचा सकता है। कुछ बाधाएँ बाकी हैं, पर शोधकर्ता उम्मीद करते हैं कि यह विधि भविष्य में कैंसर से लड़ाई का एक मज़बूत हथियार बनेगी।
